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नई दिल्ली : दिल्ली में पत्रकारों के साथ हुए कथित उत्पीड़न और दमनकारी कार्रवाइयों के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर घटना को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लिया है और दिल्ली पुलिस आयुक्त को औपचारिक नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मानवाधिकार आयोग के इस त्वरित और सख्त कदम का विभिन्न स्तरों पर स्वागत किया जा रहा है। असम के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त और राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. दिव्यज्योति सैकिया ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के इस कदम की सराहना करते हुए इसका पूर्ण समर्थन किया है। एक बयान में डॉ. सैकिया ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बिल्कुल सही समय पर एक बेहद उचित और सराहनीय कदम उठाया है। उन्होंने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि देश में प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जब सत्ताधारी दल या सरकार लोकतांत्रिक तरीकों से पत्रकारों की आवाज को दबाने में असफल रहती है, तो वह बलपूर्वक और प्रशासनिक दबाव के जरिए उन्हें नियंत्रित करने की कुचेष्टा करती है, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक और निंदनीय है। विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब इस मामले में पुलिस प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा और उनके उत्पीड़न के मामलों पर अब राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है, और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिल्ली पुलिस इस मामले में मानवाधिकार आयोग को क्या जवाब देती है।