अंतर्राष्ट्रीय मैदान पर खेल सकेंगी अफगान महिला फुटबॉलर

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स्विट्जरलैंड, ज्यूरिख : फीफा काउंसिल ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए निर्वासित अफगान महिला फुटबॉलरों को आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का रास्ता साफ कर दिया है। अब इन खिलाड़ियों को खेलने के लिए तालिबान अधिकारियों की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। यह निर्णय अफगान वुमेन यूनाइटेड नाम की उस टीम को मान्यता देता है, जो 2021 में अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन और महिलाओं के खेलों पर लगे प्रतिबंध के बाद देश छोड़कर चली गई थीं। फीफा ने इसे शासन व्यवस्था से जुड़ा एक ऐतिहासिक फैसला बताया है, जिसके तहत अब ये खिलाड़ी फीफा के साथ समन्वय करके आधिकारिक अफगानिस्तान राष्ट्रीय टीम के रूप में खेल सकेंगी। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने इस विकास को विश्व खेल जगत में एक शक्तिशाली और अभूतपूर्व कदम करार दिया है। उन्होंने कहा कि अफगान महिलाओं को उनके देश के लिए खेलने का अवसर देकर फीफा अपने सिद्धांतों को जमीन पर उतार रहा है और इस ऐतिहासिक पहल का नेतृत्व करने पर उन्हें गर्व है। गौरतलब है कि 2021 के बाद अफगानिस्तान में महिला फुटबॉल पूरी तरह बिखर गया था क्योंकि तालिबान ने प्रशिक्षण केंद्रों को बंद कर महिलाओं के खेलने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद कई खिलाड़ियों ने ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और पश्चिम एशिया के देशों में शरण ली थी।मई 2025 में अनुमोदित अफगान महिला फुटबॉल की रणनीति पर आधारित यह सुधार अब अफगान वुमेन यूनाइटेड.को एक औपचारिक संरचना के रूप में मान्यता देता है। पूर्व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी नादिया नदीम ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह खिलाड़ियों को केवल पीड़ित के रूप में नहीं बल्कि एक एलीट एथलीट के तौर पर पहचान देता है। वहीं पूर्व कप्तान खालिदा पोपल ने इसे पहचान और सम्मान से जुड़ा एक बेहद प्रतीकात्मक कदम बताया है। मानवाधिकार समूहों ने भी इसकी सराहना करते हुए कहा है कि यह खेल निकायों के लिए एक वैश्विक उदाहरण पेश करता है। इस टीम ने अपनी नई यात्रा की शुरुआत शानदार ढंग से की है, जहां उन्होंने मोरक्को में हुए एक मैच में लीबिया को 7-0 से मात दी। अब यह टीम जून के पहले हफ्ते में न्यूजीलैंड में अभ्यास शिविर में हिस्सा लेगी।
 
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